कृपा कृष्ण की
हलधर का हल
कृपा कृष्ण की
हलधर का हल
कर्मभूमि पर
नूतन हलचल
कर्मभूमि पर
नूतन हलचल
कृपा कृष्ण की
बलधर का बल चला भूमि पर
बलधर का बल चला भूमि पर
हलधर का हल चला भूमि पर
चला भूमि पर
चले पार्थ के बाण प्रखर तर
झरे भूमि पर बादळ झर-झर
बंजर बनता
चला हराथल
हो हो
बंजर बनता
चला हराथल
दौङ रहा
मन पैदल-पैदल
कृपा कृष्ण की
मरुथल पर युं टुट पङे घन
मरुथल पर युं टुट पङे घन
बना मरुस्थल अनुपम उपवन
अनुपम उपवन
जगाह-जगाह उद्यान मनोहर
उद्यानों में स्वच्छ सरोवर
स्वच्छ सरोवर
सरोवरों में भरा विमल जल
ओ सरोवरों में भरा विमल जल
सपनों से
भर गया हराथल
कृपा कृष्ण की
विराने में बसा नगर हैं
विराने में बसा नगर हैं
सपनो जैसे महल सुघर हैं
महल सुघर हैं
मिलें नयें जीवन को नवस्वर
अमरावती बसी भू- थल पर
बसी भू-थल पर
घना परिश्रम सफल हुआ बल
हो घना परिश्रम सफल हुआ बल
हरित हुआ हरि का भूमण्ङल
कृपा कृष्ण की
हलधर का हल
कर्मभूमि पर नूतन हलचल
कृपा कृष्ण की
कृपा कृष्ण की
कृपा कृष्ण की
कृपा कृष्ण की



